छत्तीसगढ़

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से गंगाधर नेताम बने सफल मत्स्य उद्यमी

Shantanu Roy
27 April 2026 11:20 PM IST
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से गंगाधर नेताम बने सफल मत्स्य उद्यमी
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छग
Kondagaon. कोंडागांव। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से जिले में मत्स्य पालन क्षेत्र के समग्र विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य मत्स्य संसाधनों का संतुलित एवं समावेशी उपयोग सुनिश्चित करते हुए मछुआरों और मछली पालकों की आय में वृद्धि करना है। योजना के तहत भूमि एवं जल संसाधनों का बेहतर उपयोग कर मत्स्य उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। साथ ही मत्स्य उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
मत्स्य संपदा
योजना का लाभ उठाकर ग्राम सातगांव के गंगाधर नेताम आधुनिक तकनीकों के माध्यम से मत्स्य पालन कर अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत पोंड लाइनर तकनीक से तालाब का निर्माण कराया है। इस पर कुल 14 लाख रुपये की लागत आई, जिसमें उन्हें 8 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ। इस तकनीक की मदद से वे कम स्थान में अधिक उत्पादन कर बेहतर आय अर्जित कर रहे हैं।


उन्होंने बताया कि साल के दो सीजन में लगभग 35 क्विंटल तक मछली का उत्पादन होता है। जिससे सालाना लगभग 03 से 04 लाख रुपए तक की आय प्राप्त कर रहे हैं। गंगाधर नेताम ने बताया कि विभाग द्वारा योजना के लाभ के साथ साथ विभागीय अधिकारियों द्वारा सतत तकनीकी मार्गदर्शन भी मिला। जिससे उन्हें मछली पालन के कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिली। गंगाधर जैसे कई किसान इस योजना के माध्यम से मत्स्य पालन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल कर आर्थिक रूप से सशक्त बन रहे हैं। पोंड लाइनर तकनीक एक आधुनिक विधि है, जिसमें तालाब या जलाशय के तल और किनारों पर विशेष प्लास्टिक शीट बिछाई जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य पानी के रिसाव को रोकना और जल का संरक्षण करना है। यह तकनीक मत्स्य पालन, कृषि सिंचाई और वर्षा जल संचयन के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो रही है। लाइनर के उपयोग से पानी का रिसाव लगभग पूरी तरह रुक जाता है, जिससे कम पानी में भी लंबे समय तक उपयोग संभव होता है। मत्स्य पालन में पानी की स्थिरता बनी रहने से मछलियों की वृद्धि तेज होती है और उत्पादन बढ़ता है। इसके साथ ही बार-बार पानी भरने की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे लागत कम होती है और लाभ बढ़ता है।
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